योगी के साथ क्रूज पर सवार हुए पीएम मोदी.

योगी के साथ क्रूज पर सवार हुए पीएम मोदी

एक समय संजय गांधी ने मंदिर की तरफ जाने वाली संकरी विश्वनाथ गली को चौड़ा करने की कोशिश की थी, बाकायदा अधिकारियों को 6 महीने का समय दिया गया था, बुलडोजर्स काम पर भी लग गए थे।

ऐसे में जब इंदिरा गांधी को खबर लगीं और जब पता चला कि काशी जैसे धार्मिक रूप से संवेदनशील शहर में भी संजय गांधी का तोड़फोड़ अभियान शुरू हो गया, इंदिरा गांधी ने फौरन स्थिति के जमीनी आकलन के लिए अपनी दोस्त पुपुल जयकर को भेजा।

पीएम नरेंद्र मोदी वाराणसी में करीब 30 घंटे रहेंगे।काशी विश्‍वनाथ धाम (कॉरिडोर) का लोकार्पण करने के साथ शिव दीपावली देखेंगे तो अगले दिन मंगलवार को भाजपा शासित राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों के सम्‍मेलन को संबोधित करेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ और उप मुख्‍यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा व केशव प्रसाद मौर्य मेजबान के रूप में पूरे कार्यक्रम में रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वाराणसी में काशी विश्‍वनाथ धाम (कॉरिडोर) का लोकार्पण करेंगे। इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए देश के प्रमुख शंकराचार्य, महामंडलेश्‍वर, श्रीमहंत सहित सनातन धर्म के सभी संप्रदायों के प्रमुख और गणमान्‍य लोग काशी पहुंच गए हैं। वहीं, विश्‍वनाथ धाम के साथ सजकर तैयार पूरी काशी मंत्रोच्‍चार और शंखनाद से गूंजेगी। विश्‍वनाथ धाम लोकार्पण उत्‍सव का देश में 51 हजार स्‍थानों पर लाइव प्रसारण किया जाएगा। करीब ढाई सौ साल पहले महारानी अहिल्‍याबाई के बाद अब विश्‍वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार विश्‍वनाथ धाम के रूप में सामने आया है। 

क्‍या है विश्‍वनाथ मंदिर का इतिहास?

मुगल शासक औरंगजेब के फरमान से 1669 में आदि विश्‍वेश्‍वर के मंदिर को ध्‍वस्‍त किए जाने के बाद 1777 में मराठा साम्राज्‍य की महारानी अहिल्‍याबाई ने विश्‍वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। इसके बाद वर्ष 1835 में राजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को स्‍वर्ण मंडित कराया तो राजा औसानगंज त्रिविक्रम सिंह ने मंदिर के गर्भगृह के लिए चांदी के दरवाजे चढ़ाए थे।

काशी विश्‍वनाथ से संबंधित महत्‍वपूर्ण कालखंड पर नजर डालें तो औरंगजेब से पहले 1194 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने काशी विश्‍वनाथ मंदिर पर हमला किया था। 13वीं सदी में एक गुजराती व्‍यापारी ने मंदिर का नवीनीकरण कराया तो 14वीं सदी में शर्की वंश के शासकों ने मंदिर को नुकसान पहुंचाया। 1585 में एक बार फिर टोडरमल द्वारा काशी विश्‍वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया था। अब 436 साल में तीसरी बार मंदिर का जीर्णोद्धार विश्‍वनाथ धाम के रूप में हुआ है।

काशी विश्‍वनाथ धाम : क्‍या खास है?

चुनार के गुलाबी पत्‍थरों से सजा विश्‍वनाथ धाम पिंक सिंटी की तरह

गंगा व्‍यू गैलरी से भक्‍तों को दिखेगा विश्‍वनाथ दरबार और गंगा की अविरल धारा

पाइप लाइन से विश्‍वनाथ मंदिर गर्भगृह तक आएगी गंगधार

पहला ऐसा आध्‍यात्मिक केंद्र जहां भारत माता की भी प्रतिमा

आदि शंकराचार्य और महारानी अहिल्‍याबाई की भी प्रतिमा लगी

मुख्‍य मंदिर परिसर का विस्‍तार कर 80 फीट लंबे और 40 फीट चौड़ा परिक्रमा पथ

157 जोड़ी खंभों पर बना है परिक्रमा मंडप

352 साल बाद ज्ञानवापी मंडप-कूप और आदि विश्‍वेश्‍वर के नंदी मुख्‍य मंदिर का हिस्‍सा

चारों दिशाओं में 32 फीट ऊंचे और 40 फीट चौड़े किले जैसे फाटक

विशाल मंदिर चौक में एक समय में रह सकेंगे 50 हजार श्रद्धालु

शिव वन में दिखेंगे रुद्राक्ष, हरसिंगार, मदार आदि के वृक्ष

वाराणसी गैलरी में दिखेगी इतिहास से लेकर पहचान से जुड़ी हर चीज

कॉरिडोर एरिया के मकानों में कैद रहे 27 प्राचीन मंदिरों की मणिमाला

मंदिर परिसर में संगमरमर पर उकेरा गया है काशी के महात्‍म्‍य का चित्रात्‍मक वर्णन

निर्माण से जुड़ी खास बातें

चुनार के बलुआ पत्‍थर के अलावा सात प्रकार के लगे हैं पत्‍थर

मकराना के दूधिया मार्बल से फ्लोरिंग

जैसलमेर का मंडाना स्‍टोन घाट किनारे सीढि़यों पर

वैदिक केंद्र, संग्रहालय व खास भवनों में ग्रेनाइट और कोटा

भूकंप और भूस्‍खलन से बचाने को पत्‍थरों को जोड़ा गया है पीतल की प्‍लेटों से

18 इंच लंबी तथा 600 ग्राम वजन की पीतल प्‍लेटों को कसने के लिए 12 इंच की गुल्‍ली

पीतल और पत्‍थरों के बीच की जगह भरने को केमिकल लेपाक्‍स अल्‍ट्रा फिक्‍स का इस्‍तेमाल

श्रद्धालुओं के लिए ये सुविधाएं

तीन विश्रामालय, वैदिक केंद्र स्‍प्रीचुअल बुक स्‍टोर

कल्‍चरल सेंटर, टूरिस्‍ट फैसिलटेशन सेंटर, सिटी म्‍यूजियम

मोक्ष भवन में 18 दंपतियों के रहने की सुविधा

भोगशाला व दशनार्थी सुविधा केंद्र, पुजारी विश्राम कक्ष

गंगा तट से विश्‍वनाथ मंदिर जाने के लिए लगा है एस्‍केलेटर

विश्‍वनाथ धाम : एक नजर में

मार्च 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था शिलान्‍यास

अक्‍टूबर 2019 में जारी हुआ ग्‍लोबल टेंडर

जनवरी 2020 मकर संक्रांति से शुरू हुआ निर्माण

345 करोड़ की लागत से हुआ धाम का निर्माण

339 करोड़ की लागत से धाम के लिए खरीदे गए 300 भवन

5.3 लाख वर्ग फुट में बना है विश्‍वनाथ धाम

विश्‍वनाथ मंदिर से गंगा तट का 400 मीटर में बना है धाम

30 फीसदी क्षेत्र में बने हैं 24 भवन, शेष खुला या हरियाली को समर्पित

5.43 करोड़ रुपये से हाईटेक सुरक्षा व्‍यवस्‍था

इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर से नियंत्रण

मंदिर व आसपास चार स्‍तरीय सुरक्षा व्‍यवस्‍था

एयर सर्विलांस सिस्‍टम से आकाश में निगरानी

DKS

By News Room