संस्कृत को देश की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिले- सीजेआई

देश के मुख्य न्यायाधीश एस बोबड़े ने संस्कृत भाषा को देश की आधिकारिक भाषा बनाने की मांग की है. सीजेआई ने कल (14 अप्रैल) महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शैक्षिणक भवन के उद्घाटन के मौके पर यह बात कही. इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद थे.  

सीजेआई ने संस्कृत भाषा को देश की आधिकारिक भाषा बनाने के पीछे कई तर्क दिए. संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की 130 जयंती पर उन्हें याद करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर ने संस्कृत भाषा को देश की आधिकारिक भाषा बनाने का प्रस्ताव दिया था. क्योंकि अंबेडकर देश की राजनीतिक, सामाजिक मुद्दों को बेहतर समझते थे. अंबेडकर को पता था कि बोलने और अदालत में कार्य करने वाली भाषा में अंतर देश की जनता के लिए एक अलग प्रकार का संघर्ष होगा इसलिए उन्होंने जनभावना का ख्याल रखते हुए संस्कृत को आधिकारिक भाषा बनाने की मांग की थी. एस बोबड़े ने कहा कि संस्कृत को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिए जाने का विरोध दक्षिण के राज्य भी नहीं करेंगे.

सीजेआई ने कहा कि लॉ स्कूल भविष्य के बेहतरीन न्यायाधीशों और वकीलों को तैयार करने वाली नर्सरी होती हैं जहां लोगों के सपने साकार होते हैं. इसलिए लॉ स्कूलों के प्रशिक्षण को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए. आपको बता दें कि जस्टिस बोबड़े देश के मुख्य न्यायाधीश के पद से 23 अप्रैल 2021 को सेवानिवृत हो रहे हैं. जस्टिस एन वी रमना देश के अगले मुख्य न्यायाधीश होंगे.

By Pankaj Kumar