विश्व जनसँख्या दिवस और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम का सम्बन्ध

वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने सिफारिश की कि 11 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाए, जिसका उद्देश्य जनसंख्या के मुद्दों की तात्कालिकता और महत्त्व पर ध्यान केंद्रित करना है। UNDP जनहित और जागरूकता से प्रेरित था जिसे 11 जुलाई, 1987  को "पाँच अरब दिवस" ​​(जब विश्व की आबादी 5 अरब तक पहुँच गई थी) द्वारा सृजित किया गया था।

इस आशय का एक प्रस्ताव पारित किया गया था और इस दिन को पहली बार 11 जुलाई, 1990 को चिह्नित किया गया था।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की स्थापना वर्ष 1969 में की गई थी, उसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा ने घोषणा की कि "माता-पिता को स्वतंत्र रूप से और ज़िम्मेदारी के साथ अपने बच्चों की संख्या एवं उनके बीच अंतर निर्धारित करने का विशेष अधिकार है।

वर्ष 1987 में, इसे आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष का नाम दिया गया था, लेकिन जनसंख्या गतिविधियों के लिये संयुक्त राष्ट्र कोष के लिये मूल संक्षिप्त नाम, 'UNFPA' को बरकरार रखा गया।

UNFPA संयुक्त राष्ट्र महासभा का एक सहायक अंग है और एक यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य एजेंसी के रूप में काम करता है। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक परिषद (ECOSOC) द्वारा इसे अग्यापित किया जाता है।

UNFPA स्वास्थ्य (SDG3), शिक्षा (SDG4) और लैंगिक समानता (SDG5) पर सतत् विकास लक्ष्यों को ट्रैक करने के लिये प्रत्यक्ष रूप से काम करता है।

UNFPA संयुक्त राष्ट्र के बजट द्वारा समर्थित नहीं है बल्कि यह पूरी तरह से दाता सरकारों, अंतर सरकारी संगठनों, निजी क्षेत्र, फाउंडेशनों तथा व्यक्तियों के स्वैच्छिक योगदान द्वारा समर्थित है।

By News Room