नितिन गडकरी 16-17 सितंबर को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की प्रगति की समीक्षा करेंगे .

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी 16-17 सितंबर को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों से गुजरने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (डीएमई) की प्रगति की समीक्षा करेंगे। 98,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा 1,380 किलोमीटर लंबा यह दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। यह राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली और वित्तीय राजधानी, मुंबई के बीच सम्पर्क (कनेक्टिविटी) को बढ़ाएगा। यह एक्सप्रेस-वे क्षेत्र के शहरी केंद्रों को दिल्ली-फरीदाबाद-सोहना खंड के गलियारे (कॉरिडोर) के साथ-साथ जेवर एयरपोर्ट और मुंबई में जवाहरलाल नेहरू पोर्ट को एक छोटे संपर्क मार्ग (स्पर) के जरिए जोड़ेगा।

इसके अलावा, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के छह राज्यों से गुजरने वाला यह एक्सप्रेस-वे जयपुर, किशनगढ़, अजमेर, कोटा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भोपाल, उज्जैन, इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत जैसे आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी में सुधार लाने के साथ ही लाखों लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि लेकर आएगाI

प्रधानमंत्री के 'नये भारत (न्यू इंडिया)'  के सपने के तहत परिकल्पित इस दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे की शुरुआत 2018 में 9 मार्च 2019 को आधारशिला रखने के साथ हुई थी । 1,380 किलोमीटर में से 1,200 किलोमीटर से अधिक के लिए पहले ही ठेके दिए जा चुके हैं और कार्य भी  किए जा रहे हैं।

राज्य स्तरीय आवंटनलागत और कुल लंबाई

• 1,800 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले इस पूरे एक्सप्रेस-वे का 9 किलोमीटर का हिस्सा दिल्ली से होकर गुजरेगा, इस 9 किलोमीटर के लिए ठेके पहले ही दिए जा चुके हैंI

• 10,400 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले इस पूरे एक्सप्रेस-वे का 160 किलोमीटर का हिस्सा हरियाणा से होकर गुजरेगा, इसमें से 130 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैंI

• 16,600 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले इस पूरे एक्सप्रेस-वे का 374 किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा और 374 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।

• 11,100 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले इस पूरे एक्सप्रेस-वे का 245 किलोमीटर मध्य प्रदेश से होकर गुजरेगा और 245 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैंI 

• 35,100 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले पूरे एक्सप्रेस-वे का 423 किमी गुजरात से होकर गुजरेगा, इसमें से 390 किमी के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।

• 23,000 करोड़ से अधिक की लागत से बनने वाले कुल एक्सप्रेस-वे का 171 किलोमीटर का हिस्सा महाराष्ट्र से होकर गुजरेगा, इसमें से 80 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।

एक्सप्रेस-वे की मुख्य विशेषताएं

नए एक्सप्रेस-वे से दिल्ली और मुंबई के बीच आवागमन के समय को लगभग 24 घंटे से घटाकर 12 घंटे करने और दूरी में 130 किलोमीटर की कमी होने की उम्मीद है। इससे 32 करोड़ लीटर से अधिक के वार्षिक ईंधन की बचत होगी और कार्बन डाई ऑक्साईड (CO2) उत्सर्जन में 85 करोड़ किलोग्राम की कमी आएगी जो कि 4 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की प्रतिबद्धता के तहत राजमार्ग के किनारे 40 लाख से अधिक वृक्ष और झाड़ियाँ लगाने की योजना है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे के लिए पर्यावरण और वन्यजीव प्रभाव को कम से कम प्रभावित करना  इस परियोजना का एक आधार रहा है। यह एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया में दूसरा है जिसमें वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा है। डीएमई में 3 वन्य जीव  और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लंबाई 7 किमी होगी और ये वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे। एक्सप्रेस-वे में दो प्रतिष्ठित 8 लेन सुरंगें भी शामिल होंगी जो देश के इंजीनियरिंग कौशल का एक उत्कृष्ट प्रदर्शन होगा, इसमें से पहली मुकुंदरा अभयारण्य के माध्यम से 4 किलोमीटर के क्षेत्र में लुप्तप्राय जीवों को संकट में डाले बिना और दूसरी माथेरान पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) में 4 किमी 8 लेन-सुरंग से गुजरेगी।

यह अनूठी परियोजना बेहतरीन अभियान्त्रिकी (इंजीनियरिंग) का ही उदाहरण हैI

1. इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 12 लाख टन से अधिक स्टील की खपत होगी, जो 50 हावड़ा पुलों के निर्माण के बराबर है

2. लगभग 35 करोड़ घन मीटर मिट्टी को स्थानांतरित किया जाएगा जो निर्माण के दौरान 4 करोड़ ट्रकों के लदान के बराबर है

3. इस परियोजना के लिए 80 लाख टन सीमेंट की खपत होगी जो भारत की वार्षिक सीमेंट उत्पादन क्षमता का लगभग 2 प्रतिशत है

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे (डीएमई) विभिन्न वनों, शुष्क भूमि, पहाड़ों, नदियों जैसे कई विविध क्षेत्रों से गुजरता है और यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा व्यापक कार्य किया गया है कि यह राजमार्ग समय की कसौटी पर खरा उतरे। दिल्ली-वडोदरा खंड के लिए स्थायी फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया है, जो शुष्क क्षेत्रों से गुजरता है और परियोजना की दीर्घायु बढ़ाने के लिए उच्च वर्षा वाले वडोदरा-मुंबई खंड के लिए कठोर फुटपाथ डिजाइन को अपनाया गया है।

डीएमई ने हजारों प्रशिक्षित सिविल इंजीनियरों और 50 लाख से अधिक मानव दिवसों के काम के लिए रोजगार का भी सृजन किया है।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का एक अन्य अनूठा पहलू गलियारे के साथ उपयोगकर्ताओं की सुविधा और सुरक्षा में सुधार के लिए राजमार्ग के साथ बनाई गई 94 सुविधाओं (वे साइड अमेनिटीज -डब्ल्यूएसए) की स्थापना है। रास्ते के किनारे की सुविधाओं में पेट्रोल पंप, मोटल, विश्राम क्षेत्र, रेस्तरां और दुकानें होंगी। इन वे साइड सुविधाओं में चिकित्सा आपात स्थिति के मामले में कनेक्टिविटी बढ़ाने और लोगों को निकालने के लिए हेलीपैड भी होंगे।

हरियाणा (स्थान 1)

• राज्य में लंबाई: कुल एक्सप्रेसवे का 160 किमी हरियाणा राज्य से होकर गुजरता है और यह खंड 10,400 करोड़ से अधिक की कुल पूंजीगत लागत पर बनाया जा रहा है, जिसमें 130 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।

• सम्पर्क (कनेक्टिविटी): कुंडली-मानेसर-पलवल (केएमपी) और दिल्ली-नोएडा-दिल्ली (डीएनडी) सोहना जैसे प्रमुख राजमार्गों के साथ एक्सप्रेस-वे को जोड़ने के लिए गलियारा (कॉरिडोर) राज्य भर में नूंह और पलवल जिलों में कई इंटरचेंज के माध्यम से कनेक्टिविटी में सुधार करेगा।

• विशेषताएं: इस कॉरिडोर में 03 किलोमीटर की ऊंचाई पर बनाया हुआ एक विशिष्ट गलियारा भी होगा जो 18 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाले भारत के सबसे ऊंचे हाइवे कॉरिडोर में से एक होगा। उन्नत आरओबीआईएसएस की औसत ऊँचाई सामान्यतः 6-9 मीटर होती है।

• सड़क किनारे की सुविधाएं (वे साइड अमेनिटीज – डब्ल्यूएसए): हरियाणा राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य में रणनीतिक स्थानों पर स्थित रास्ते के किनारे 06 सुविधाएं भी होंगी।

• महत्व: हरियाणा राज्य को राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों से जोड़कर, यह गलियारा हरियाणा राज्य में आर्थिक समृद्धि और विकास लाएगा।

 परियोजना के पूरे होने की अवधि: हरियाणा राज्य में एक्सप्रेस-वे का पूरा खंड मार्च 2022 तक 214 किलोमीटर लंबे दिल्ली-जयपुर (दौसा)-लालसोत खंड के हिस्से के रूप में पूरा करने और यातायात के लिए खुला रखने का लक्ष्य है।

राजस्थान (स्थान 2 और 3)

• राज्य में लंबाई: कुल एक्सप्रेस-वे का 374 किमी राजस्थान राज्य से होकर गुजरता है और इस खंड का निर्माण 16,600 करोड़ से अधिक की कुल पूंजीगत लागत से किया जा रहा है, जिसमें सभी 374 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं।

• संपर्क (कनेक्टिविटी):

• राज्य की बढ़ती आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए यह कॉरिडोर अलवर, भरतपुर, दौसा, सवाईमाधोपुर, टोंक, बूंदी और कोटा जिलों से होकर गुजरेगा।

• एक्सप्रेस-वे के साथ इंटरचेंज के माध्यम से मौजूदा राजमार्ग नेटवर्क के साथ कॉरिडोर की कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कॉरिडोर के साथ प्रमुख इंटरचेंज की योजना बनाई गई है। ऐसा ही एक विशिष्ट इंटरचेंज दौसा के पास स्थित है और एक्सप्रेस-वे को मौजूदा आगरा-जयपुर हाइवे से जोड़ेगा।

• इसके अलावा, दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे को पूरा करने और दिल्ली व जयपुर के बीच आवागमन समय को 4 घंटे से घटाकर 2 घंटे से कम करने के लिए बुंदीकुई से जयपुर के लिए एक अतिरिक्त सम्पर्क मार्ग (स्पर) की योजना है।

• विशेषताएं :

• राजस्थान वन्य जीवन, वनस्पतियों और जीवों से समृद्ध राज्य है। एक्सप्रेस-वे कुछ विश्व प्रसिद्ध अभयारण्यों जैसे रणथंभौर टाइगर रिजर्व और चंबल अभयारण्य से होकर गुजरता है। पारिस्थितिकी तंत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं। एक्सप्रेस-वे एशिया में पहला और दुनिया में दूसरा है जिसमें वन्यजीवों की अप्रतिबंधित आवाजाही की सुविधा के लिए पशु हवाई पुल (ओवरपास) की सुविधा है। डीएमई में 3 वन्यजीव और 5 हवाई पुल (ओवरपास) होंगे जिनकी संयुक्त लंबाई 7 किमी होगी जो वन्यजीवों के निर्बाध आवागमन के लिए समर्पित होंगे। इस एक्सप्रेस-वे में भारत की पहली प्रतिष्ठित 8 लेन 4 किमी सुरंग भी शामिल होगी जो इस क्षेत्र में लुप्तप्राय जीवों को परेशान किए बिना मुकुंदरा अभयारण्य से होकर गुजरेगी।

• इसके अलावा, राज्य की नदियों पर बाणगंगा नदी, बनास नदी, मेज नदी और चंबल नदी जैसे कई पुल बनाए जा रहे हैं।

• चाकन बांध के पार एक प्रतिष्ठित 1100 मीटर लंबे ऊंचाई के खंड (एलिवेटेड स्ट्रेच) की योजना बनाई गई है जो एक इंजीनियरिंग का बेहतरीन उदाहरण होगा।

• सड़क किनारे की सुविधाएं (डब्ल्यूएसए): राजस्थान राज्य में रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ-साथ यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के लिए राज्य में रणनीतिक स्थानों पर स्थित रास्ते की 28 सुविधाएं भी होंगी।

• परियोजना के पूरे होने की अवधि: राजस्‍थान राज्य में सभी पैकेज दिल्ली-जयपुर (दौसा)-लालसोत खंड के साथ 214 किलोमीटर के मार्च 2022 तक पूरा करने और यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य है। लालसोत से कोटा तक के शेष खंड को लक्षित किया गया है जिसे मार्च 2023 तक पूरा कर लिया जाएगा।

मध्य प्रदेश (स्थान 4)

• राज्य में लंबाई: कुल एक्सप्रेस-वे में से, 245 किमी मध्य प्रदेश राज्य से होकर गुजरता है और 11,100 करोड़ से अधिक की कुल पूंजी लागत पर बनाया जा रहा है। पूरा खंड आवंटित कर दिया गया है और निर्माण के उन्नत चरणों में है जिसमें 100 किमी से अधिक का निर्माण पहले ही हो चुका है और शेष 145 किमी के लिए निर्माण कार्य चल रहा है।

• सम्पर्क (कनेक्टिविटी): 7 प्रमुख स्थानों पर इंटरचेंज की योजना बनाई गई है। सीतामऊ इंटरचेंज सहित मंदसौर क्षेत्र में 3 सम्पर्क मार्गों के साथ भानपुरा-झालावाड़, गरोठ में सुवासरा रोड तक। इसी तरह रतलाम में 3 और उज्जैन नगाड़ा रोड, महू-नीमच रोड और रतलाम-सिलाना रोड के साथ भी झाबुआ-कुशालगढ़ रोड के पास एक और इंटरचेंज की योजना है। इन इंटरचेंजों के माध्यम से, एक्सप्रेस-वे राज्य के प्रमुख शहरों और कस्बों जैसे गरोठ, उज्जैन, रतलाम, इंदौर और झाबुआ से जुड़ जाएगा।

• विशिष्टता :

• मध्य प्रदेश राज्य में गलियारे की प्रमुख विशेषताओं में से एक कुशल क्रो फ्लाईट एलाइनमेंट सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर पहाड़ी मार्ग में परिवर्तन किया है। एक पहल के माध्यम से झावड़ा के पहाड़ी इलाकों में एक प्रतिष्ठित 600 मीटर ऊंचे प्रमुख पुल का निर्माण किया गया है।

• मध्य प्रदेश राज्य में एक और महत्वपूर्ण विशेषता चंबल नदी पर एक प्रतिष्ठित पुल का निर्माण है।

• सड़क किनारे की सुविधाएं (डब्ल्यूएसए): मध्य प्रदेश में विश्व स्तरीय सुविधाओं वाले 11 सड़क किनारे सुविधाओं (डब्ल्यूएसए) का निर्माण किया जा रहा है। यात्रियों को आराम और सुरक्षा प्रदान करते हुए, यह राज्य में रोजगार पैदा करने का एक स्रोत भी होगा।

• परियोजना के पूरे होने की अवधि: एक्सप्रेस-वे का 245 किलोमीटर लंबा मध्य प्रदेश खंड निर्माण के उन्नत चरणों में है और नवंबर 2022 तक इसे पूरा करने और सार्वजनिक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य है।

गुजरात (स्थान 5/6)

• राज्य में लंबाई: 423 किलोमीटर का एक्सप्रेस-वे गुजरात में 35,100 करोड़ रुपये से अधिक की कुल पूंजीगत लागत पर बनाया गया है, जिसमें 390 किलोमीटर के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं और शेष पैकेज शीघ्र ही प्रदान किया जाएगा। गलियारे (कॉरिडोर) के दो खंड:  दिल्ली-वडोदरा खंड और वडोदरा-मुंबई खंड राज्य से होकर गुजरेंगे।

• संपर्क (कनेक्टिविटी): गुजरात देश का एक प्रमुख आर्थिक केंद्र है और दाहोद, लिमखेड़ा, पंचमहल, वडोदरा, भरूच, सूरत और वलसाड के कस्बों तथा शहरों को सम्पर्क (कनेक्टिविटी) प्रदान करने के लिए राज्य भर में कई इंटरचेंज की योजना बनाई गई है। इस एक्सप्रेस-वे को वडोदरा-अहमदाबाद एक्सप्रेस-वे के जरिए राज्य की राजधानी से भी जोड़ा जाएगा। गुजरात राज्य में 60 बड़े पुलों, 17 इंटरचेंजों, 17 फ्लाईओवरों और 8 आरओबी की योजना बनाई गई है।

 विशिष्टताएं :

 गुजरात राज्य में इस गलियारे की एक प्रमुख विशेषता दिल्ली-वडोदरा खंड में सतत डिजाइन के साथ नियोजित अभिनव फुटपाथ डिजाइन और एक्सप्रेस-वे के आर्थिक जीवनकाल को अधिकतम करने के लिए जलवायु परिस्थितियों के आधार पर वडोदरा-मुंबई खंड के लिए ठोस फुटपाथ डिजाइन है।

 भरूच के पास नर्मदा नदी पर बना एक प्रतिष्ठित पुल 2 किमी लंबा एक्सट्रैडोज्ड केबल स्पैन ब्रिज एक्सप्रेस-वे पर बनने वाला भारत का पहला 8 लेन का पुल होगा। यह भरूच शहर के पास प्रतिष्ठित इंटरचेंज के साथ देश में एक्सप्रेस-वे विकास की पहचान को नई ऊर्जा देगाI

 सड़क किनारे की सुविधाएं (डब्ल्यूएसए): गुजरात राज्य में 33 सड़क किनारे की सुविधाएं (डब्ल्यूएसए) बनाने की योजना बनाई जा रही है ताकि राज्य में आवागमन के साथ-साथ रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जा सकें।

 परियोजना के पूरे होने की अवधि:  समग्र एक्सप्रेस-वे का एक प्रमुख खंड, वडोदरा –अंकलेश्वर का 100 किमी खंड निर्माण के उन्नत चरणों में है और मार्च 2022 तक इसको यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य है। अंकलेश्वर से तलसारी तक के शेष खंड को मार्च 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है ।

समग्र गलियारे (कॉरिडोर) की पूर्णता की समय सारिणी :

इस एक्सप्रेस-वे के दो खंड, दिल्ली- दौसा-लालसोत खंड जो दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेस-वे का हिस्सा है और वडोदरा-अंकलेश्वर खंड जो वडोदरा को भरूच के आर्थिक केंद्र से जोड़ता है,  को मार्च 2022 तक यातायात के लिए खोले जाने की संभावना है। पूरे एक्सप्रेस-वे को मार्च 2023 तक पूरा करने की योजना है।

निर्माण पूर्व चरण के दौरान प्रमुख चुनौतियां व्यापक भूमि अधिग्रहण और समय पर मंजूरी जैसे पर्यावरण, वन और वन्यजीव थे। दिल्ली से वडोदरा खंड के लिए 01 वर्ष से कम की समयावधि में 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण का कार्य पूरा कर लिया गया था। इसके अलावा, कार्यान्वयन के दौरान समय बचाने के लिए समानांतर में आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां भी प्राप्त कर ली गई थी।

तेजी से कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए, परियोजना के पूरे जीवन चक्र में प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा दिया गया था, जहां उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे कि एलआईडीएआर, जीपीआर, डिजिटल मानचित्रों का उपयोग विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की तैयारी के दौरान किया गया थाI  इसके बाद निर्माण चरण के दौरान ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, उपकरण टेलीमैटिक्स, प्री-कास्टिंग का उपयोग किया गया था। इसके अतिरिक्त कौशलपूर्ण निविदा प्रक्रियाओं के माध्यम से समय कम करने के लिए निर्माण की ऐसी पैकेजिंग को भी वैज्ञानिक रूप से नियोजित किया गया था जो एक साथ कई हिस्सों में काम करने में सक्षम थी।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का मानचित्र

 

By News Room